राष्ट्रीय

‘लू’ से तप रहा देश, डेंजर जोन में भारत का 90 प्रतिशत हिस्सा

नई दिल्ली। भारत में गर्मी ने कहर बरपा रखा है। जलवायु परिवर्तन के कारण भारत में ‘लू’ लगातार और भी खतरनाक होती जा रही है। एक नई रिसर्च में कहा गया है कि देश का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा और पूरी दिल्ली लू के प्रभावों के ‘खतरे के क्षेत्र’ में है। जलवायु परिवर्तन के कारण भारत में लगातार लू खतरनाक होती जा रही है। बता दें, यह अध्ययन कैंब्रिज विश्वविद्यालय में रमित देबनाथ और उनके सहयोगियों द्वारा किया गया है। रिसर्च में कहा गया है कि ‘लू’ ने संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में भारत की प्रगति को पहले की तुलना में ज्यादा बाधित किया है।

गौरतलब है रविवार को नवी मुंबई में महाराष्ट्र सरकार के एक पुरस्कार समारोह में लू की वजह से 13 लोगों की मौत हो गई थी। लू की यह घटना अबतक की सबसे बड़ी दर्दनाक घटनाओं में से एक है। वहीं, भारत मौसम विज्ञान विभाग ने हाल ही में उत्तर-पश्चिम और प्रायद्वीपीय क्षेत्रों को छोडक़र अप्रैल से जून तक देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक तापमान रहने की बात कही है। 1901 के बाद साल 2023 में सबसे गर्म फरवरी का अनुभव किया। हालांकि, मार्च में सामान्य से अधिक बारिश हुई, जिससे तापमान सामान्य रहा।

साल 2022 का मार्च अबतक का सबसे गर्म और 121 वर्षों में तीसरा सबसे सूखा वर्ष था। एक रिपोर्ट की माने तो देश में करीब 75 प्रतिशत कर्मचारी यानी लगभग 38 करोड़ लोग गर्मी की वजह से तनाव में रहते हैं। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के पूर्व सचिव एम राजीवन द्वारा वैज्ञानिक कमलजीत रे, एसएस रे, आरके गिरि और एपी डिमरी के साथ लिखे गए एक पेपर से पता चलता है कि लू ने भारत में 50 वर्षों में 17 हजार से अधिक लोगों की जान ले ली है। यह पेपर साल 2021 में प्रकाशित हुआ था। इसमें बताया गया कि 1971-2019 तक देश में लू की 706 घटनाएं हुई हैं।

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