स्वास्थ्य

हर मौसम में ठंडे रहते हैं पैर? ब्लड सर्कुलेशन से लेकर थायरॉयड तक, इन 5 बीमारियों का हो सकता है संकेत

शरीर में होने वाले कई छोटे बदलाव हमारी सेहत से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी देते हैं, लेकिन अक्सर लोग इन्हें सामान्य परेशानी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। पैरों में बार-बार दर्द होना, पंजों का ठंडा रहना, झुनझुनी महसूस होना या टखनों में सूजन आना भी ऐसे ही लक्षण हैं। खासतौर पर अगर सर्दियों के अलावा गर्मियों में भी आपके पैर ठंडे रहते हैं, तो इसके पीछे किसी स्वास्थ्य समस्या की भूमिका हो सकती है।

आमतौर पर ठंडे मौसम में पैरों का तापमान कम होना सामान्य है। ऐसा शरीर के तापमान को नियंत्रित करने की प्राकृतिक प्रक्रिया के कारण होता है। लेकिन यदि मौसम सामान्य होने के बावजूद पैर लगातार ठंडे महसूस होते हैं, तो इसकी वजह रक्त संचार में कमी, हार्मोनल बदलाव या नसों से जुड़ी समस्या हो सकती है। ऐसे लक्षण लंबे समय तक बने रहने पर चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है।

1. खराब ब्लड सर्कुलेशन हो सकता है कारण

पैरों में लगातार ठंडापन महसूस होने की एक प्रमुख वजह रक्त संचार का प्रभावित होना है। जब पैरों तक पर्याप्त मात्रा में रक्त नहीं पहुंचता, तो पंजों का तापमान कम महसूस हो सकता है। पेरिफेरल आर्टरी डिजीज (PAD) में धमनियों के अंदर प्लाक जमा होने के कारण रक्त वाहिकाएं संकरी हो जाती हैं। इससे पैरों तक खून का प्रवाह कम हो सकता है।

इस समस्या में पैरों में ठंडक के साथ दर्द, चलने के दौरान ऐंठन और झुनझुनी जैसी परेशानियां भी हो सकती हैं। गंभीर स्थिति में ऊतकों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है।

2. थायरॉयड की समस्या भी हो सकती है वजह

थायरॉयड ग्रंथि शरीर के मेटाबॉलिज्म और तापमान को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जब यह ग्रंथि पर्याप्त हार्मोन नहीं बना पाती, तो हाइपोथायरायडिज्म की स्थिति हो सकती है। इसके कारण व्यक्ति को सामान्य तापमान में भी अधिक ठंड महसूस हो सकती है।

इसके अलावा थकान, त्वचा में रूखापन, वजन में बदलाव और सुस्ती जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।

3. एनीमिया यानी खून की कमी

शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा कम होने पर अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। एनीमिया की स्थिति में हाथ-पैर ठंडे रहने के साथ कमजोरी, थकान, चक्कर आना और सांस फूलने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। यदि लगातार ऐसे लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर की सलाह से हीमोग्लोबिन की जांच कराना उपयोगी हो सकता है।

4. डायबिटीज और नसों को नुकसान

लंबे समय तक ब्लड शुगर का स्तर नियंत्रित नहीं रहने पर नसों को नुकसान पहुंच सकता है। इस स्थिति को डायबिटिक न्यूरोपैथी कहा जाता है। इसमें पैरों में झुनझुनी, जलन, सुन्नपन और तापमान महसूस करने की क्षमता में बदलाव हो सकता है।

कई बार व्यक्ति को पैर ठंडे महसूस होते हैं, जबकि छूने पर उनका तापमान सामान्य होता है। ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

5. दिल से जुड़ी समस्याएं

हृदय शरीर के विभिन्न हिस्सों तक रक्त पहुंचाने का काम करता है। यदि हृदय की पंपिंग क्षमता प्रभावित होती है, तो शरीर के अंगों तक रक्त का प्रवाह भी प्रभावित हो सकता है। कुछ लोगों में इसके कारण हाथ-पैर ठंडे रहने और टखनों में सूजन जैसी परेशानियां देखने को मिलती हैं।

यदि पैरों में सूजन के साथ सांस लेने में परेशानी या असामान्य थकान भी हो, तो जल्द चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

कब डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, पैरों में कभी-कभार ठंडापन महसूस होना हमेशा किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता। हालांकि कुछ लक्षण लगातार बने रहें तो जांच जरूरी है।

  • बिना ठंड के भी पैरों का लगातार ठंडा रहना।

  • पैरों में बार-बार दर्द, झुनझुनी या सुन्नपन होना।

  • चलने के दौरान पिंडलियों या पैरों में दर्द होना।

  • पैरों और टखनों में बार-बार सूजन आना।

  • पैरों की त्वचा के रंग या तापमान में असामान्य बदलाव होना।

विशेषज्ञों के मुताबिक, विटामिन बी12 की कमी और डायबिटिक न्यूरोपैथी जैसी स्थितियां भी पैरों में दर्द और संवेदना संबंधी परेशानियां पैदा कर सकती हैं। इसलिए लगातार लक्षणों को केवल थकान या मौसम का असर मानकर टालना उचित नहीं है। समय पर जांच और सही उपचार से कई संभावित जटिलताओं से बचाव किया जा सकता है।

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